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गुरु गोबिंद सिंह जी के ऊपर कुछ पंक्तियां?

चिड़ियों से मैं बाज
लडाऊ , गीदड़ों को मैं शेर बनाऊ !
सवा लाख से एक लडाऊ तभी गोबिंद सिंह नाम
कहउँ !!

गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म ?

कभी कभी कोई व्यक्ति गुरु गोबिंद सिंह जी का नाम सुनता है तो उसके मन में केवल एक ही व्याख्या उत्पन होती है–संत-सिपाही।

शौर्य और साहस के प्रतीक गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म 22 दिसंबर 1666 को बिहार के गाव पटना में हुआ।

गोविंद राय उनके बचपन का नाम था और वे दसवें सिख गुरु थे। एक आध्यात्मिक गुरु होने के साथ-साथ वे एक कवि, निर्भयी योद्धा, और दार्शनिक भी थे।

Guru gobind singh jayanti 2020

गुरु गोबिंद सिंह जी की लिखित पुस्तिका ?

गुरु गोविंद सिंह जहां विश्व की बलिदानी परम्परा में अद्वितीय थे, वहीं वे स्वयं एक महान लेखक, मौलिक चिंतक तथा संस्कृत सहित कई भाषाओं के ज्ञाता भी थे।

गुरु गोबिंद सिंह जी के पिता के साथ अन्याय ?

जब उनके पिता, गुरु तेग बहादुर सिंह जी ने इस्लाम में परिवर्तित होने से इनकार कर दिया, तो उनका सिर काट दिया गया। तब 9 वर्ष के गुरु गोबिंद सिंह को औपचारिक रूप से सिखों के गुरु के रूप में स्थापित किया गया।

गुरु गोबिंद सिंह जी कि आत्मकथा ?

सिखों की पवित्र ग्रन्थ गुरु ग्रंथ साहिब को गुरू गोबिन्द सिंह जी ने पूरा किया तथा उन्हें गुरु के रूप में सुशोभित किया।

उनकी आत्मकथा बिचित्र नाटक को माना जाता है। यही उनके जीवन के विषय में जानकारी का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है।
यह दसम ग्रन्थ का एक भाग है। दसम ग्रन्थ, गुरू गोबिन्द सिंह की कृतियों के संकलन का नाम है।

गुरु गोबिंद सिंह जी, गुरु गद्दी पर विराजमान कब हुए ?

1675 को कश्मीरी पंडितों की फरियाद सुनकर श्री गुरु तेगबहादुर जी ने दिल्ली के चाँदनी चौक में बलिदान दिया। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी 11 नवंबर 1675 को गुरु गद्दी पर विराजमान हुए।

गुरु गविन्द सिंघ जयंती का इतिहास?

1699 ई.में धर्म एवं समाज की रक्षा करने हेतु ही गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की।

पाँच प्यारे बनाकर उन्हें गुरु का दर्जा देकर स्वयं उनके शिष्य बन जाते हैं और कहते हैं-जहाँ पाँच सिख इकट्ठे होंगे, वहीं मैं निवास करूँगा।

उन्होंने सभी जातियों के भेद-भाव को समाप्त करके समानता स्थापित की और उनमें आत्म-सम्मान की भावना भी पैदा की।

गुरु गविन्द सिंघ जयंती समय 2021?

सप्तमी तिथि शुरू – १९ जनवरी २०२१; १०:५५
सप्तमी तिथि खतम – २० जनवरी २०२१; १:१५

गुरु गविन्द सिंघ जयंती 2021 कैसे मनाई जाती है?

गुरु गोबिंद सिंह जयंती,अवसर पर सभी गुरुद्वारे मै बड़े जुलूस और प्राथना सभा का माहौल बनता है।

यह एक धार्मिक उत्सव जिसमे समृद्धि की प्राथना की जाती है।

इस वक्त लोग भक्ति गीत गाते है और सभी भक्तो के बीच मिठाई और शरबत बाट टे है ।

गोबिंद सिंह की जयंती ?


गुरु गोबिंद सिंह जयंती के अवसर के लिए विशेष व्यंजन बनाए जाते है.

गोबिंद सिंह जी ने ही खालसा वाणी दी। जिसे “वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह” कहा जाता है।

उन्होंने ही सिखों के लिए ‘पांच ककार’ अनिवार्य किया।

इसमें सिखों के लिए केश, कड़ा, कृपाण, कंघा और कच्छा धारण करने का रिवाज है।

गुरु गोबिंद सिंह जी की मृत्यु ?

गुरु गोबिंद सिंह जी ने 42 वर्ष तक जुल्म के खिलाफ डटकर मुकाबला करते हुए सन् 1708 को नांदेड में ही सचखंड गमन कर दिया

शुभ कामनाएं गुर गोबिंद सिंह जयंती?

लख-लख बधाई आपको,
गुरु गोविंद सिंह का आशीर्वाद मिले आपको!!

खुशी का जीवन से रिश्‍ता हो ऐसा,
दीए का बाती संग रिश्‍ता जैसे!!
हैप्‍पी गुरु गोविंद सिंह जयंती

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