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मकरसंक्रांति 2021

 

 मकरसंक्रांति 2021 ,हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहारों में मकर संक्रांति का त्योहार भी शामिल है, जो सूर्य के उत्तरायन होने पर मनाया जाता है। इस त्योहार की विशेष बात यह है कि इसे अन्य त्योहारों की तरह अलग-अलग तारीखों पर नहीं मानते, बल्कि हर साल 14 जनवरी को ही मनाया जाता है, जब सूर्य उत्तरायन होकर मकर रेखा से गुजरता है।

मकासंक्रंती 2021

मकरसंक्रां का महत्व?

दरअसल, सूर्य के एक राशि तिसे दूसरी राशि में जाने को ही संक्रांति कहते हैं। एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति के बीच का समय को ही सौर मास कहते है। वैसे तो सूर्य संक्रांति 12 हैं, लेकिन इनमें से चार संक्रांति महत्वपूर्ण हैं जिनमें मेष, कर्क, तुला, मकर संक्रांति हैं। मकर संक्रांति के शुभ मुहूर्त के दिन स्नान-दान और पुण्य के शुभ समय का विशेष महत्व माना जाता है।

मकासंक्रंती 2021 कब  मनाया जाएगा ?

मकासंक्रंती 2021
मकासंक्रंती 2021

कभी-कभी यह पूर्व एक दिन पहले या बाद में यानि 13 या 15 जनवरी को भी मनाया जाता है लेकिन ऐसा कम ही होता है। मकर संक्रांति का संबंध सीधा पृथ्वी के भूगोल और सूर्य की स्थिति से है। जब भी सूर्य मकर रेखा पर आता है, वह दिन 14 जनवरी ही होता है, अत: इस दिन मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है।

भारत के कौनसे हिस्से में मकरसंक्रांति 2021 मनाया जाता है?

india

मकर संक्रांति के पर्व को भारत के अलग-अललग क्षेत्रों में अलग-अलग तरह से मनाया जाता है। केरल,आंध्रप्रदेश और कर्नाटक में इसे संक्रांति कहा जाता है और तमिलनाडु में इसे पोंगल पर्व के रूप में मनाया जाता है। पंजाब और हरियाणा में इस समय नई फसल का स्वागत किया जाता है और लोहड़ी का त्योहार उल्हास से मनाया जाता है, वहीं असम में बिहू के रूप में इस पर्व को उमंग के साथ मनाया जाता है। हर प्रांत में इसका नाम और मनाने का तरीका अलग-अलग होता है।

मकरसंक्रांति 2021 के दिन क्या क्या किया जाता है?

मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गुड़ और तिल लगाकर नर्मदा में स्नान करना लाभदायी होता है।इसके बाद दान संक्रांति में गुड़, तेल, कंबल, फल, छाता आदि दान करने से लाभ मिलता है और पुण्यफल की प्राप्ति होती है। 14 जनवरी ऐसा दिन है, जब धरती पर अच्छे दिन की शुरुआत होती है। ऐसा इसलिए कि सूर्य दक्षिण के बजाय अब उत्तर को गमन करने लग जाता है। जब तक सूर्य पूर्व से दक्षिण की ओर गमन करता है तब तक उसकी किरणों का असर खराब माना गया है, लेकिन जब वह पूर्व से उत्तर की ओर गमन करते लगता है तब उसकी किरणें सेहत और शांति को बढ़ाती हैं।

मकरसंक्रांति  2021 में कौनसे पकवान बनाना चाहिए?

इस पर्व मै सर्दी का मौसम होता है। इस समय शरीर को गर्मी की आवश्यकता होती है ।तब तिल व गुड़ के व्यंजन यह काम बखूबी करते हैं, क्‍योंकि तिल में तेल की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। जिसका सेवन करने से शरीर में पर्याप्त मात्रा में तेल पहुंचता है और जो हमारे शरीर को गर्माहट देता है।ऐसे ही गुड़ की तासीर भी गर्म होती है. तिल व गुड़ के व्यंजन बनाए सर्दी के मौसम में हमारे शरीर में आवश्यक गर्मी पहुंचाते हैं। यही कारण है कि मकर संक्रांति के अवसर पर तिल व गुड़ के व्यंजन प्रमुखता से खाए जाते हैं।

मकरसंक्रांति 2021 कहां कहां मनाया जाता है?

भारत में मनाएं जाने हर त्यौहार के पीछे कोई न कोई मान्यताएं व परंपराएं हैं।जिस तरह से होली पर रंग खेलना, दिवाली पर पटाखें जलाना। ठीक इसी तरह से मकर संक्रांति पर भी पतंगे उड़ाने की परंपरा है। परन्तु पतंग उड़ाने के पीछे कोई धार्मिक कारण नहीं अपितु मनोवैज्ञानिक पक्ष है। गुजरात व सौराष्‍ट्र में मकर संक्रांति के त्‍यौहार पर कई दिनों की लंबी छुट्टियां भी होती हैं। यहीं इस त्‍यौहार को भारत के किसी भी अन्‍य राज्‍य की तुलना में अधिक हर्षोल्‍लास से मनाया जाता है।

 

मकर संक्रान्ति 2021 मुहूर्त

नई दिल्ली, भारत के लिए
पुण्य काल मुहूर्त : 08:03:07 से 12:30:00 तक

अवधि : 4 घंटे 26 मिनट

महापुण्य काल मुहूर्त :08:03:07 से 08:27:07 तक

अवधि :0 घंटे 24 मिनट

संक्रांति पल :08:03:07

मकर संक्रांति का सारांश :-

इन सभी मान्यताओं के अलावा मकर संक्रांति पर्व एक उत्साह और भी जुड़ा है। इस दिन पतंग उड़ाने का भी विशेष महत्व होता है और लोग बेहद आनंद और उल्लास के साथ पतंगबाजी करते हैं। इस दिन कई स्थानों पर पतंगबाजी के बड़े-बड़े आयोजन भी किए जाते हैं।

मीठी बोली, मीठी जुबान, मकर संक्रांति पर यही है पैगाम ! मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ.