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गणेश चतुर्थी 2020

 

“वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटी समप्रभ ,
निर्विध्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।”गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है।

भारत के विभिन्न भागों में यह त्यौहार मनाया जाता है परन्तु महाराष्ट्र में बडी़ धूमधाम से मनाया जाता है।
पुराणों के अनुसार इसी दिन पर श्री गणेश जी का जन्म हुआ था।
इस लिए इसे चतुर्थी भी कहा जाता है।
भारत के लोगों का मानना है कि भगवान श्री गणेश बहुत खुशी और समृद्धि घर और जीवन मै लाते हैं और उनकी सभी बाधाओं को दूर करते हैं।
 लिए गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए लोग उनके जन्मदिवस को गणेश चतुर्थी के रूप में मानते है।
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा करते है।
भारत में अनेक जगहों पर भगवान गणेश की बड़ी प्रतिमा स्थापित की जाती है।
 प्रतिमा का ११ दिनों तक पूजन किया जाता है।
बड़ी संख्या में भक्तजन उनके दर्शन करने पहुँचते है।
ग्यारहवें दिन बाद गानों और ढोल तशे के साथ गणेश प्रतिमा को किसी तालाब इत्यादि जल में विसर्जित किया जाता है।
मूर्ति स्थापना के अधिन पूजा होती है।

 घरों में डेढ़(१ १/२) दिन के लिए भी विराजमान होते है ।

श्री गणेश जी के जन्मोत्सव के तौर पर मनाये जाना वाला गणेश चतुर्थी का त्योहार इस बार २१ अगस्त को पड़ रहा है।

हिंदू मान्यता के मुताबिक इसे भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है।
इस अवसर पर भक्त अपने घरों में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करते हैं और फिर कुछ दिन के अंतराल पर विसर्जन किया जाता है।
महाराष्ट्र में बहुत धूमधाम से मनाये जाने वाले इस त्योहार के दौरान भक्त अमूमन ७ से ११ दिन के लिए अपने घर में गणपति को विराजमान कराते हैं।
मगर,कुछ लोग डेढ़,तीन पांच,सात या दस दिन में भी गणपति का विसर्जन करते हैं।
 तरह से ११ दिन चलने वाला गणेशोत्सव अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त हो जाता है।

क्यों मनाया जाता है ?

पौराणिक कथा के अनुसार माना जाता है कि एक बार भगवान शिव बाहर गए हुए थे।

उस दौरान देवी पार्वती स्नान करने जा रहीं थीं, तो उन्होंने अपने स्नानगृह की रक्षा हेतु अपने शरीर पर लगे हुए चंदन लेप से एक मूर्ति बनाई और फिर उसमें प्राण डाल दिए।
उस बालक को पार्वतीजी  ने पुत्र के रूप कई स्वीकारा।

उन्होंने उसे स्नानगृह के बाहर खड़ा कर यह आदेश दे दिया कि कोई भी आए तो उसे अंदर न आने दे।

इसके बाद मतापर्वती स्नान करने चलीं गईं।

तभी भगवान शिव वहां मते से मिलने आ पहुंचे, जैसे वो अंदर जाने लगे तो गणेश जी ने उन्हें द्वार पर रोक दिया।

भगवान शिव ने गणेश से अंदर जाने की बात कही, लेकिन गणेश ने पार्वती के आदेश अनुसार उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। जिसके कारण शिव और गणेश में संग्राम छिड़ गया।

  स्वयं भी शक्ति के अंश थे, वो भगवान शंकर के हर प्रहार को निष्फल करते गए जिसके बाद शिव को अत्यंत क्रोध ने क्रोध में आकर अपने त्रिशूल से गणेश की गर्दन पर वार कर उसे धड़ से अलग कर दिया।

देवी पार्वती ने जैसे ही गणेश जी को उस अवस्था में देखा वे क्रोधित हो गई।और रोने लगी।

शिवजी से नाराज़ हो गई।
 बाद सभी देवता भी घबरा गए।
उसी समय भगवान शिव ने गणेश को फिर से जीवित करने की बात कही।
उसका सिर ढूंढने जंगल में चले गए।
कुछ नहीं मिलने के बाद परिस्थिति समझ कर उन्होंने ,हाथी के सिर को लगने फैसला लिया।
इसके बाद गणपति के मृत धड़ पर हाथी का सिर लगाकर उन्हें पुन: जीवित किया गया, इस प्रकार गजानन का जन्म हुआ।
उस दिन भादो मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी थी।
तो फिर उसी दिन से गणेश चतुर्थी का पर्व गणेश जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
शिव जी ने पार्वती से कहा कि विश्व मै किसी की भी कार्य से पहले सर्वप्रथम गणेश जी किपूजा कि जाएगी और उन्हे शांत किया।
उस दिन से गणेश जी को काम के सुररवत मै याद किया जाता है ‘ श्री गणेशाय नमः ‘ इस मंत्र का उपचार कर। क्युकी गणपती जी को विघ्न हारता भी मेहते है जो जी हार संकट को हर लेते है यानी भक्तो को संकट मुक्त करते है ।

गणेश मूर्ति स्थापना समय और विधि

गणेश चतुर्थी को शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की स्थापना करना शुभ होता है।

*इस बार २१ अगस्त को ११ बजे सुबह चुतुर्थी शुरू होगी।

*२२ अगस्त को ७.५७ शाम तक चुतुर्थी तिथि रहेगी।

इसमें राहुकाल को हटाकर आप  गणपति जी  की स्थापना कर सकते हैं।
*पूजन का शुभ मुहूर्त दोपहर १२.४५ बजे होगा।

*विशेष मुहूर्त सुबह ११.४५ से दोपहर १२.४५ से है।

गणपति की स्थापना करते हुए मूर्ति का मुंह पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखें ।

शुरू होने से पहले संकल्प लिया जाता है , इसके बाद भगवान गणपति  का आह्वान किया जाता है।
बाद गणपति की मंत्रों के उच्चारण के बाद स्थापना की जाती है। गणेश जी को मोदक ,धूप, दीप, वस्त्र, फूल, फल,  अर्पित किए जाते हैं।
इसके बाद पूजा की थाल तयार कर गणेश जी की आरती उतारी जाती है।

भारत के विभिन्न हिस्सों का उत्साह

भारत में महाराष्ट्र ,गुजरात,आंध्र प्रदेश, तमिल नाडु इन्न जगहों पर बड़ी मात्रा मै भक्त पाए जाते है।

मुख्य रूप से मुंबई जो कि महाराष्ट्र को राजधानी है यहां पर इस त्यहोर को बड़ी हर्ष और उल्लास से मनाया जाता है।
सबसे ज्यादा मूर्ति की स्थापना मुंबई मै ही होती है।
क्युकी अब लगभग सभी घरों मै गणेश जी लाए जाते है।
मुंबई मै स्तिथ कई गणेश पंडाल है जो कि आजादी के समय से है और कई तोह उससे भी पहले है ।
उन्न सभी मै के सर्व प्रचलित लाल बाग के राजा जो की लाल बाग साउथ मुंबई मै विराजमान होते है।
इससे इच्छा पूर्ति गणपति या नवास का राजा भी कहा जाता है।
यअपने भक्त जनो कि इससे पूर्ण करता है।
देश भर से लोग इसके दर्शन करने जाते है।
इनके दर्शन करने हेतु भारत के उद्योग पति,फिल्मी जगत के सितारे , राजनेता भी आते है।
प्रकार की कतार लगाई जाती है एक मुख दर्शन और एक चरण स्पर्श की।
चरण स्पर्श की कतार मै २४ से २८ घंटे  लगते है।
इतनी भारी मात्रा मै भक्त उपस्थित होने के कारण।
मगर इस साल कॉरोना आब्धा आने के कारण लाल बाग के राजा नहीं विराजमान होंगे।
गणेश चतुर्थी का त्यौहार भारत के अलावा नेपाल  थाईलैंड ,कंबोडिया,इंडोनेशिया और चीन में भी मनाया जाता है।