Spread the love

पारसी नव वर्ष 2020

भारत एक सेक्यूलर देश है जाना सभी जातियो तोह समान रूप से जगह दी गई है।

भारत में सभी जाती धर्म के लोग मिलजुल कर रहते हैं ।

धर्म और रीति-रिवाजों से जुड़े रहने कि एक मात्र वजह हमारे संस्कार है।

पारसी नववर्ष, पारसी समुदाय के लिए आस्था, उमंग और उल्लास के संगम का त्यौहार है।

हर वर्ष अगस्त महीने में पारसी समाज के सामाजिक परम्परा के अनुसार श्रद्धालु नववर्ष मनाते हैं।

इस वर्ष पारसी नववर्ष जिसे ‘नवरोज’ भी कहा जाता है, १६ अगस्त २०२० दिन रविवार को बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जायेगा।

पारसी कैलेंडर का पहला दिन को ही नवरोज कहा जाता है।

फारस के राजा जमशेद जो कि पारसियों के वीर योद्धा थे उन्होंने ही पहली बार अपने समुदाय के लोगों को पारसी कैलेंडर के बारे में बताया था तबसे पारसी न्यू ईयर को ‘जमशेदी नवरोज’ भी कहा जाता है।

साल का पहला दिन होने के कारण यह बड़ा सुबह माना जाता है।

पूरा समुदाय इसका दिल खोलकर स्वागत करता है।

एक समय था जब पारसी समाज का एक बड़ा समुदाय हुआ करता था।

लेकिन आधुनिक तकनीक, विज्ञान, विदेशी नौकरियां के कारण सब सबने बड़े शहर को और रुख किया और वही बसने लगे इससे समुदाय मै काफी सीमित होता गया ।

शहरों और गांवों में इस समाज के कम लोग ही रह गए हैं और खासकर युवा वर्ग लेकिन हां, कुछ युवा ऐसे भी हैं, जो अपने माता पिता की देखभाल करने आज भी शहर यहीं रह कर अपना जीवन बिताते है।

नवरोज मनाने की परंपरा करीब 3000 सालों से चली आ रही है।

कुछ पारसी आबादी ईरान मै भी बड़ी है जो अपना नववर्ष ३१ मार्च को मनाते है ।

इस बार १६ अगस्त को मनाया जा रहा है।

पारसी समुदाय के लोग इसे बहुत ही धूम-धाम से मनाते हैं, क्योंकि उनके लिए ये पर्व बहुत ही खास होता है।

परन्तु इस साल कोरोना महमारी के कारण वे इतना धूम ध से नहीं माना पाएंगे।

पारसी धर्म कैलेंडर के हिसाब से 1 साल ३६० दिन होते है और ५ दिन गाथा के लिए होते हैं।

अपने पूर्वजों को याद करने को वे गाथा कहते है।

साल खत्म होने के ठीक ५ दिन पहले पूर्वजों को याद किया जाता है।

इसका भी एक मुख्य मतलब है।

यह पूजा विधिनूसार सुबह ३.३० बजे से इसके लिए खास पूजा-अर्चना की जाती है।

चांदी या स्टील के पात्र में फूल रखकर पारसी अपने पूर्वजों को याद करते हैं।

*पारसी समाज में अग्नि का भी विशेष महत्व है और अग्नि कि खास तौर पर पूजा भी की जाती है।

 

न्यू ईयर बनाने का तरीका

इस त्यौहार को मनाने के लिए पारसी धर्म के श्रद्धालु पूर्व में ही तैयारी शुरू कर देते हैं, अपने घरों की,अपने आसपास की सफाई और अपने व्यापार स्थल कि सफाई कर सभी धर्मावलंबी ज्यादा से ज्यादा स्वच्छ बनाते हैं।

घर के भीतर और बाहर मुख्य रूप से सजावट करते हैं।घर के मुख्य द्वार से आने वाले अतिथियों को फूलों की माला , स्वागत के रूप मै दी जाती है।

अपने घर के बाहर चाक पाउडर से आकर्षक और बहुत सुंदर सजाते हैं यानी रंगोली बनते है।

मुख्य मनमोहक प्राकृतिक दृश्य इन सजावटों में शामिल होते हैं।

गुलाबजल छिड़कर मेहमानों का स्वागत किया जाता है ।

गुलाब जल महकदार और पवित्र पानी जो कि सुभ कामो मै इस्तेमाल किया जाता है।

यह दिन पर समर्थ लोग गरीबों औऱ जरूरत मंदों की सहायता भी करते हैं।

उन्हे पैसे कपड़े तथा खाना दे कर।

 

नवरोज़

सुभा नहने के बाद फिर नास्ता करके उसके बाद जाते हैं मंदिर

सुबह का नास्ता करने के बाद अग्नि मंदिर जाने की परम्परा अपने आप में अनुठी है क्योंकि यह पूरे पर्व को ही एक साथ जोड़ती है।

समाज और परिवार की उन्नति की प्रार्थना के लिए अतः सुख शांति के लिए नाश्ता करने के बाद सुभा ही वे प्रार्थना के लिए एक साथ मंदिर जाते हैं और नववर्ष की शुभकामनाएं एक दूसरे को देते हैं।

लोग अपने अच्छे और बुरे कर्मों पर विचार करते हैं यह इस पर्व की सबसे बड़ी बात है ।

सकारात्मक संभावनाओं पर ध्यान देकर इस दौरान दृढ़ता से चलने का संकल्प लेते हैं।

सच्चाई और निष्ठा से अपने कर्तव्य का पालन उनका उद्देश्य होता है ।

अपने पारसी रिश्तेदारों से मुलाकात और शुभकामनाओं के बाद, जश्न शुरू होता है और लोग मूंग दाल, पुलाव और बोटी जैसे विभिन्न विशेष आहारों का आनंद उठाते हैं।

धनसाग यह सिर्फ नवरोज पे बनाया जाता है इसका विशेष बड़ा महत्व है।मीठे में फालूदा खिलाया जाता है।

पारसी समाज में आज भी पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है नया साल।

इस पर्व को पतेती और ‘जमशेदी नवरोज’ के भी नाम से जाना जाता है।

 

पारसी नव वर्ष का इतिहास

 

3000 हजार साल पहले प्रोफेट जोरो अस्टर द्वारा बनाए गए थे।

ये पारसी दसवीं सदी में भारत आए थे ।

जब इस्लामिक समुदाय के लोग पर्सिया में आए तो पारसी भारत और पाकिस्तान के और चल दिए।

आज करीब पूरे दुनिया में 26 crore पारसी हैं ।

यह मुम्बई और गुजरात में बहुत ही खुशी और उल्हास के साथ बनाया जाता है ।

हमारे देश लग भाग 70000 पारसी हैं जो यह त्योहार बनाते हैं ।

वह उस दिन नए कपड़े पहन कर एक दूसरे को बधाइयां देते हैं।

वह आज अपने घर के बाहर रंगोली बनाते हैं ।

हमरे टीम की तरफ से आपको पारसी नव वर्ष की खूब सारी बधाइयां ।