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73 स्वंत्रता दिवस-

तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा – नेताजी सुभाष चंद्र बोस

हर साल भारत मै १५ अगस्त को आजादी का पर्व मनाया जाता है।

तकरीबन २०० साल तक अंग्रेजों की गुलामी से भारत इस दिन आजाद है था।
 दिवस को हम राष्ट्रीय त्योहार के रूप में मानते हैं।
इस बार १५ अगस्त को स्वतंत्रता दिवस की ७४ वीं वर्षगांठ (74th Independence Day) मनाएंगे।
इस दिन भारत को आजादी मिली थी और तब से यह दिन भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।

इसलिए ही १५ अगस्त को राजपत्रित अवकाश (Gazetted Holiday) दिया जाता है।

हमारे लिए स्वतंत्रता संघर्ष काफी लम्‍बे समय चला और  यह कूब थकान पूर्वक अनुभव था तभी भारत को आजादी मिलने बड़ा भाग्यशाली था क्युकी एक समय पर वे काफी कठिन लग रहा था ।

लेकिन इसमें सारी मेहनत ,कठिनई, और बलिदान हमारे स्वतंत्र सैनानइयो की है जिस वजह से हम आज इस आजाद भारत रहते है ।

हर साल इस दिन पर लाल किले पल प्रधनमंट्री देख का तिरंगा फहराकर देश को संभोदित करते है ।

इस वर्ष १५ अगस्त  को शनिवार के दिन हमारे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी हर साल की तरह यह आवियान करेंगे।
यह उनका सातवा स्वतंत्रता दिवस होगा उनके प्रधान मंत्री बनने के बाद ।
तिरंगा फहराने के बाद राष्ट्र गान गया जाता है और २१ बार बंदूक से गोलियां चला कर  आदर स्वरूप सलामी दी जाती है।
 के साथ भारत का सशस्त्र बल, अर्धसैनिक बल और एनएनसीसी कैडेड परेड बताइए जाती हैं।
इस दिन टीवी पर डी डी नेशनल चैनल और आल इंडिया रेडियो में लाल किले का  सीधा प्रसारण (Live) जाता है।

इस साल बच्चों को बुजुर्गों को कोरोना महामारी के चलते  इस कार्यक्रम में शामिल नहीं किया जाएगा।

दिल्ली के साथ देश के सभी राज्यों में भी मुख्यमंत्री सम्मान के साथ तिरंगा फहराते हैं।

 महान स्वतंत्रता सेनानियों को इस दिन श्रधांजलि दी जाती और उनका सम्मान किया जाता है।
१५ अगस्त  देशभक्ति के गाने और जीत के नारे लगाये जाते हैं।
वहीं कुछ लोग पतंग उड़ाते है।
भारत में पतंग उड़ाने का खेल भी स्वतंत्रता दिवस का प्रतीक है, इस दिन भारतिय आकाश मै विभिन्न प्रकार के पतंग देखने को मिलते है कुछ तिरंगे के तीन रंगो जैसे होते हैं, जो राष्ट्रीय ध्वज को प्रदर्शित करते हैं।

स्वतंत्रता का ऐतिहासिक महत्व

 

ईस्ट इंडिया कंपनी ने १७५७ में प्लासि की लड़ाई मै नवाब को हराया जो की बंगाल के अंतिम नवाब थे।

जिसके बाद से भारत मै ब्रिटिश शासन की शुरुवात हुए ।

फिर कई वर्षो बाद भारत के स्वतंत्र सैनानी ने ब्रिटिश राज्य क विद्रोह किया जो कि असफल रहा।

काफी प्रयासों के बाद १८८५ में भारत  की पहली राजनीतिक पार्टी “भारतिय राष्ट्र कांग्रेस” का गठन हुआ ।

पहले विष्व युद्ध के समापन के  बाद भारत के लोगो मै स्वराज की भावना जगी।

{स्वराज यह सब्ध हिंदू हृदय सम्राट छत्रपति शिवाजी माराज ने पहली बार १६४५ में किया था।

जिसे बादमे उन्होंने एक दमदार नारा बनाकर सभी को एकत्रित कर देश से कई विदेशि दुश्मनों को  मार भगाया}

कुछ वक्त बाद भारत के लोगो कि स्टिथी देख कर भारतीय राष्ट्र कांग्रेस ने लाहौर में पूर्ण स्वराज की घोषणा कर दी।

स्वराज यह हमारा जन्म सिद्ध अधिकार बताते हुए  लोकमान्य तिलक जी सभी को जकरुक करते गये।

भारत की पूर्ण रूप से आजादी कि मांग को लेकर ब्रितश सरकार चिंतित हो गई थी उन्होंने काफी प्रयत्न किए इससे तोड़ने के लिए ।

मोहनदास करमचंद गांधी जो कि भारततिय कांग्रेस के नेता थे उन्होंने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ अभियान चलाया और उसे एक जन आंदोलन में बदल दिया।

 दो महत्वपूर्ण हथियार थे
*सत्य और अहिंसा* जिसके बल पर उन्होंने बहर्ट को आजादी दिलाईअंत में, ब्रिटिश सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ  बैठकों की और उसके श्रृंखला के बाद।

अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन, जिन्होंने पूर्व-स्वतंत्र भारत में कार्य किया, उन्होंने यह प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त कि।

लॉर्ड माउंटबेटन ने १५ अगस्त १९४८ मै ब्रिटिश भारत को दो नए राष्ट्र में  विभाजित किया जोकि भारत और पाकिस्तान बने।

तब से प्रति वर्ष १५ अगस्त के दिन, भारत का राष्ट्रीय ध्वज कई सार्वजनिक स्थानों पर फहराया जाता है।

भारत के राजधानी दिल्ली में प्रधान मंत्री लाल किले पर उसे फहराते है।

पूर्ण भारत के सभी हिस्सो मै ध्वजवांदन समारोह किया जाता है।

स्कूलों और कॉलेजों सहित शैक्षणिक संस्थानो मै  इस दिन का ऐतिहासिक महत्व छात्रों को बताया जाता है।
स्वतंत्र का ज्ञान और महत्त्व प्रदान करने के लिए एक विशेष समारोह का आयोजन करते हैं।
बच्चे इस अवसर पर के  तिरंगे वाली पतंग उड़ाके इस महाउत्सव का आनंद लेते है।

देश का तिरंगा

 

•हमारे तिरंगे में मौजूद केसरिया रंग को साहस और बलिदान का प्रतीक मान ते है।

•सफेद रंग सच्चाई, शांति और पवित्रता को संबोधित करता है

•तिरंगे के तीसरे यानी हरे रंग को सन्पन्नता का प्रतीक माना जाता है।

•नीले रंग से तिरंगे के बीच में बना हुआ अशोक चक्र जीवन और उसकी गतिशीलता का प्रतीक है ।अशोक चक्र में बनी हुई २४ लकीरें धर्म के २४नियमों को दर्शाती हैं।

भारत की आजादी की लड़ाई में यूं तो लाखों-करोड़ों हिंदुस्तानियों ने भाग लिया लेकिन कुछ ऐसे सपूत भी थे जो  की लड़ाई के प्रतीक बनकर उभरे।

राष्ट्र के लिए अपने घर बार चोद कर अपनी प्राणों की आहुति देने वाले सैकड़ों देशबक्त को हमारा भाव पूर्वक नमन है (जिनमे मंगल पाण्डेय, रानी लक्ष्मी बाई, भगत सिंह, खान, रामप्रसाद बिस्मिल,चन्द्र शेखर आजाद जैसे और कई हस्तियों ने अपना सहयोग दिया)

हिन्दु्स्ता को आजादी दिलाने में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अहम भूमिका रही थी।

लेकिन आपको इस बात की जानकारी नहीं होगी कि जब भारत को आजादी मिली थी तो महात्मा गांधी इस जश्न में नहीं थे वे बंगाल मै हुई हिंसा को शांत करने जाना पड़ा था ।

१५ अगस्त की तारीख हो ही दक्षिण कोरिया, बहरीन और कांगो देश का भी स्वतंत्रता दिवस होता है।

देश के सभी रक्ष्को को हमें दिल से नमन कर सल्यूट करनी चाहिए।

 यह बलिदान बड़ा अनमोल है जोकि पैसे मै नहीं तोला जा सकता।

जय हिन्द
वन्दे मातरम
इंकलाब जिंदाबाद
भारत माता की जय🙏

Bharatkeutsav की तरफ से आप सभी को स्वतंत्र दिवस कि हार्दिक शुभकामनाएं।

जला हुआ राख नहीं, अमर दीप हूँ, जो मिट गया वतन पर, मैं वो शहीद हूँ।