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तीज 2020

“सावन लाया है तीज का त्यौहार
बुला रही हैं आपको खुसियो कि बहार”

सावन का महीना प्रेम और अल्हास का महीना माना जाता है।

तीज का त्योहार उत्तर भारतीय महिलाओं द्वारा धूमधाम से मनाया जाता है।

यह त्यौहार बड़े जोश और उमंग के साथ मनाया जाता है।

तीज भारत के अनेक भागों में मनाई जाती है, परन्तु राजस्थान की राजधानी जयपुर में इसका विशेष महत्त्व है।

मुख्यतः स्त्रियों का त्यौहार होता है जो कि श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है।

सावन में आने वाली तीज को श्रावणी तीज और हरियाली तीज के नाम से जाना जाता है।

सावन का महीना आते ही आसमान काले बदलो से भर  जाता है और वर्षा की फुहारें पड़ते ही हर वस्तु नवरूप को प्राप्त करती है,इस समय पृथ्वी चारों तरफ हरियाली की चादर ओढ़ लेती है।

प्रकृति का सौंदर्य इस त्यौहार को और भी अनूठा बना देते हैं।

इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा का विधान है।तीज का सम्पूर्ण रंग प्रकृति के रंग में मिलकर अपनी अनुपम छठा बिखेरता है प्रकृति भी अपने सौंदर्य में लिपटी मानो इसी समय का इंतज़ार कर रही होती है।

यह माना जाता है कि-

इस दिन माता पार्वती ने कठोर तपस्या से भगवान शिव को पति के रूप में पाया था।

कन्या और विवाहित महिलाएं इस दिन उपवास रखती हैं। व्रत रखने वाली अधिकतर महिलाएं कुछ भी ठोस खाना नहीं पसंद करती हैं।

कुछ महिलाएं इस दिन बिल्कुल भी पानी ग्रहण नहीं करती हैं।इस दिन  पेड़, नदी और जल के देवता वरुण की पूजा की जाती है और श्रृंगार भी किया जाता है।

इसके अन्या नाम है जैसे श्रावणी तीज, हरितालिका तीज, कजली तीज  हरियाली तीज।आइए जानते हैं इस व्रत का महत्‍व और अन्‍य खास बातें.

 

तीज का महत्त्व

इसे सर्व प्रथम गिरिराज हिमालय की पुत्री पार्वती ने किया था जिसके फलस्वरूप उन्हें पति के रुप में भगवान शंकर की प्राप्ति हुई।

हिंदू धर्म गुरुओं के अनुसार, माता पार्वती को १०८ बार जन्म-पुनर्जन्म लेना पड़ा था तब जाकर भगवान शिव ने उनसे विवाह के हा करी।

देवी पार्वती को तीज माता भी कहते हैं।

कुंवारी लड़कियां भी मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए इस दिन व्रत रखकर माता पार्वती की पूजा करती हैं।

भगवान शिव और माता पार्वती जैसा वैवाहिक जीवन प्राप्‍त करने के लिए यह व्रत रखा जाता है.

हिंदू धर्म में हरियाली तीज का विशेष महत्‍व है।यह मुख्‍य रूप से पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश, राजस्‍थान और दिल्‍ली में मनाया जाता है।

यह महिलाओं के सजने संवरने और खुशियां मनाने का त्‍योहार है।

सावन मास के शुक्‍ल पक्ष की तृतीया को हर साल हरियाली तीज के रूप में मनाया जाता है।

तीज पर महिलाएं पति की दीर्घायु और अच्‍छे स्‍वास्‍थ्‍य की कामना के लिए व्रत करती हैं।इस दिन देशभर में महिलाएं रंग बिरंगे कपड़े पहनकर गीत गाती हैं और नृत्य करती हैं।

महिलाएं साथ मिलकर हाथों पर मेहंदी लगाने के साथ ही एक दूसरे को किस्से-कहानियां सुनाती हैं।

घेवर,बेसन के लड्डू, नारियल के लड्डू, आलू का हलवा जैसी कई मिठाइयां इस दिन बनायी और खायी जाती हैं।

 

पूजा विधि

 

सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद मन में पूजा करने का संकल्प लें।

यह निर्जला व्रत और भगवान शिव और माता पार्वती जी की विधि पूर्वक पूजा करने का विधान है।

इस दिन साफ-सफाई कर घर को तोरण-मंडप से सजाया जाता है।

इस दिन महिलाएं पूरा दिन बिना भोजन-जल के दिन व्यतीत करती हैं तथा दूसरे दिन सुबह स्नान और पूजा के बाद व्रत पूरा करके भोजन ग्रहण करती हैं।

इस दिन व्रत के साथ-साथ शाम को व्रत की कथा सुनी जाती हैइस व्रत को करवा चौथ से भी कठिन व्रत बताया जाता है।

इस दिन स्त्रियों के मायके से श्रृंगार का सामान और मिठाइयां उनके ससुराल भेजी जाती है।

हरियाली तीज के दिन महिलाएं सुबह घर के काम और स्नान करने के बाद सोलह श्रृंगार करके निर्जला व्रत रखती हैं।

इसके बाद मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा होती है।

पूजा के अंत मै तीज के कथा होती है। हरियाली तीज व्रत का पूजन रातभर चलता है।

इस दौरान महिलाएं जागरण और कीर्तन भी करती हैं।

इसके बाद घर में उत्सव मनाया जाता है और भजन व लोक नृत्य किए जाते है।पूजा के अंत में तीज की कथा सुन्ने  के बाद ही महिलाएं अपना व्रत समाप्‍त करती हैं।

 

इस दिन १६ श्रृंगार

महिलाएं तीज की पूजा से पहले सजती हैं और १६ श्रृंगार करती हैं और

भगवान से यह कामना करती है कि ये सदा सुहागिन रहे।इस दिन हरे वस्त्र, हरी चुनरी, हरा लहरिया, हरा श्रृंगार, मेहंदी, झूला-झूलने का भी रिवाज है।

जगह-जगह झूले पड़ते हैं। अखंड सौभाग्य के लिए किए जाने वाले इस व्रत में महिलाएं मां पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करती हैं।

इसमें १६ श्रृंगार की वस्तुएं माता जी को अर्पित की जाती है।

इसमें सिंदूर,चूड़ी, कंगन, मेंहदी, साड़ी, चुनरी, बिंदी आदि वस्तुशामिल होता है।

इन सामग्री को अर्पित करने के समय  महिलाएं माता पार्वती से अखंड सौभाग्‍य रहने का वरदान मांगती हैं।

अन्य रसम

कई स्‍थानों पर महिलाएं इस दिन अपने मायके जाती हैं और इस दिन झूला झूलने का भी प्रचलन हैं।

इस उत्सव को हम मेंहदी रस्म भी कह सकते हैं।

इस दिन अपने हाथों और पैरों में महिलाएं मेंहदी रचाती हैं।

मेंहदी रचाने के बाद सुहागिन महिलाएं अपने कुल की बुजुर्ग महिलाओं से आशीर्वाद लेती हैं।

भारत में तीज के कई रूप प्रचलित हैं.

पंजाब और राजस्थान में इसे ‘हरियाली तीज’ के नाम से जानते हैं, तो वहीं मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में ‘कजरी तीज’.

समय और जगह के साथ इस पर्व को मनाने के तरीकों में भी बदलाव आया है।

हरियाली तीज के दिन अनेक स्थानों पर मेले लगते हैं और माता पार्वती की सवारी बड़े धूमधाम से निकाली जाती है।

यह व्रत महिलाओं के विवाह से भी जुडा़ होता है, इसलिए इसे अत्यंत शिद्दत के साथ किया जाता है।

आप सभी को हमारे तरफ से तीज की हार्दिक शुभकामनाएं