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 रक्षा बंधन हिंदी में-

“तोड़े से भी ना टूटे,यह ऐसा मन बंधन है ,
इस बंधन को सारी दुनिया कहती रक्षा बंधन है”

रक्षाबंधन यह हिन्दू वे जैन त्योहार है। यह हिन्दू कैलेंडर के अनुसार प्रतिवर्ष श्रवण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।

-हिंदुओं का महत्वपूर्ण त्यौहार है जो भारत के सभी हिस्सों में मनाया जाता है।भारत के अलावा भी विश्व भर में जहाँ पर हिन्दू धर्मं के लोग रहते हैं, इस पर्व को भाई बहनों के बीच मनाया जाता है.

– इस त्यौहार का आध्यात्मिक महत्व के साथ साथ ऐतिहासिक महत्त्व भी है।यह नेपाल के पहाड़ी इलाकों में ब्राह्मण एवं क्षेत्रीय समुदाय में रक्षा बन्धन गुरू और भागिनेय के हाथ से बाँधा जाता है। लेकिन दक्षिण सीमा में रहने वाले भारतीय मूल के नेपाली भारतीयों की तरह बहन से राखी बँधवाते हैं।

भाई बहन का प्यार-

-बहना ने भाई की कलाई से प्यार बाँधा है, प्यार के दो तार से संसार बाँधा है… सुमन कल्याणपुर द्वारा गाया गया यह गाना रक्षाबंधन का बेहद चर्चित गाना है।

-भले ही ये गाना बहुत पुराना न हो पर भाई की कलाई पर राखी बाँधने का सिलसिला बेहद प्राचीन है।

जिस प्रकार बहनों को भाई को राखी बांधना का इंतजार होता है उसी तरह दूर-दराज बसे भाइयों को भी इस बात का इंतजार है कि उनकी बहना उन्हें राखी भेजे।

-उन भाइयों को निराश होने की जरूरत नहीं है, जिनकी अपनी सगी बहन नहीं है, क्योंकि मुँहबोली बहनों से राखी बंधवाने की परंपरा भी काफी पुरानी है।

 

महत्व-

इस दिन भाइयों की समृद्धि के लिए  बहन उनकी कलाई पर राखी बांधती है.

रक्षा-बंधन का यह त्यौहार भाई-बहन के प्रेम और कर्तव्य के सम्बन्ध को समर्पित है।यह भाई बहन के रिश्ते का प्रसिद्ध त्योहार है, रक्षा का अर्थ सुरक्षा और बंधन का अर्थ बद्यर होता है।

-यह सामान्यतः जुलाई – ऑगस्ट मै आता है।

रक्षाबंधन त्योहार राखी के नाम से भी जाना जाता है।इस त्योहार में राखी का बड़ा महत्व है।

इस त्योहार से भाई और बहन के प्रति एक दूसरे का ख्याल रखने का भाव भी बढ़ता है।

रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई को राखी बांधती हैं।

भाई अपनी बहन को सदैव साथ निभाने और उसकी रक्षा के लिए आश्वस्त करता है।

– परम्परा हमारे भारत में  काफी प्रचलित है, और ये श्रावण पूर्णिमा का बहुत बड़ा त्यौहार है।रक्षा बंधन ऐसा त्यौहार है, जब सभी बहनें अपने भाइयों के घर जाती हैं,और अपने भाइयों को राखी बांधती हैं, और कहती हैं

मैं तुम्हारी रक्षा करूंगी और तुम मेरी रक्षा करो”

-और ये कोई ज़रूरी नहीं है, कि वे उनके अपने सगे भाई ही हों, वह अन्य किसी को भी राखी बाँधकर बहन का रिश्ता निभाती हैं।तो ये प्रथा इस देश में काफी प्रचलित है।

रक्षाबंधन २०२० सुभ मूहर्त

सोमवार, ३ ऑगास्ट २०२० को मनाया जाएगा।
भद्रा का समय – 05:44 AM से 09:25 AM तक ।

पूर्णिमा तिथि –  प्रारंभ 2 अगस्त को 09:28 PM से  3 अगस्त को 09:28 PM तक होगी ।

इस लिहाज से आप भद्रा समाप्त होने के बाद पूरे दिन रक्षा बंधन का त्योहार मना सकते हैं।

रक्षा बंधन अपराह्न का मुहूर्त – 01:49 PM से 04:29 PM

प्रदोष काल मुहूर्त – 07:10 PM से 09:17 PM

  रक्षा बंधन पर पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा जिस वजह से इस दिन की शुभत्ता और अधिक बढ़ गई है।

 

पूजा की विधि

रक्षाबंधन के दिन अपने भाई को इस तरह राखी बांधें. सबसे पहले राखी की थाली सजाएं।

इस थाली में रोली,अक्षत, पीली, कुमकुम,  सरसों के बीज, दीपक और राखी रखें।

इसके बाद भाई को तिलक लगाकर अक्षत लगाले और  उसके दाहिने हाथ में रक्षा सूत्र यानी कि राखी बांधें।

राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारें। फिर भाई को मिठाई खिलाएं। अगर भाई आपसे बड़ा है तो चरण स्‍पर्श कर उसका आशीर्वाद लें ।

अगर बहन बड़ी हो तो भाई को चरण स्‍पर्श करना चाहिए। राखी बांधने के बाद भाइयों को इच्‍छा और सामर्थ्‍य के अनुसार बहनों को भेंट देनी चाहिए।

यह भी कहा जाता है की इस  दिन बहनों के हाथ से राखी बंधवाने से भूत-प्रेत एवं अन्य बाधाओं से भाई की रक्षा होती है।

जिन लोगों की बहनें नहीं हैं ,वह आज के दिन किसी को मुंहबोली बहन बनाकर राखी बंधवाएं तो शुभ फल मिलता है।

इन दिनों चांदी एवं सोनी की राखी का प्रचलन भी काफी बढ़ गया है।

चांदी एवं सोना शुद्ध धातु माना जाता है अतः इनकी राखी बांधी जा सकती है लेकिन, इनमें रेशम का धागा लपेट लेना चाहिए।

क्युकी उसके बिना सोना चांदी का कोई महत्व नहीं।

इसलिए ध्यान दे आपके राखी में रेशम का डोर हो।

धार्मिक महाउत्सव –

है भाई-बहनों के अलावा पुरोहित भी अपने यजमान को राखी बांधते हैं और यजमान अपने पुरोहित को।

इस प्रकार राखी बंधकर दोनों एक दूसरे के कल्याण एवं उन्नति की कामना करते हैं।

क्यों की हम प्रकृति से ही आए है और प्रकृति भी जीवन की रक्षक हैं इसलिए रक्षाबंधन के दिन कई स्थानों पर वृक्षों को भी राखी बांधी जाती है।

वृक्ष को ईश्वर माना जाता है ।

ईश्वर संसार के रचयिता एवं पालन करने वाले हैं अतः इन्हें रक्षा सूत्र अवश्य बांधना

 एतिहास-

रक्षाबंधन कब प्रारम्भ हुआ इसके विषय में कोई निश्चित कथा नहीं है लेकिन जैसा कि भविष्य पुराण में लिखा है,इसकी सुरवत सबसे पहले इन्द्र की पत्नी ने देवराज इन्द्र को देवासुर संग्राम में असुरों पर विजय पाने के लिए मंत्र से सिद्ध करके रक्षा सूत्र बंधा था।

इस सूत्र की शक्ति से देवराज युद्ध में विजयी हुए और असुरो की हार हुई।

श्री कृष्णा का उल्लेख जब शिशुपाल के वध के समय सुदर्शन चक्र से भगवान श्री कृष्ण की उंगली कट गई थी।

तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का आंचल फाड़कर श्रीकृष्ण की अंगुली पर बांध दिया।

इस दिन सावन पूर्णिमा की तिथि थी।

भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को वचन दिया कि समय आने पर वह आंचल के एक-एक सूत का कर्ज उतारेंगे।

द्रौपदी के चीरहरण के समय श्रीकृष्ण ने इसी वचन को निभाया।

यम और यमुना संबंधित एक पौराणिक कहानी के अनुसार मृत के देवता जब अपनी बहन यमुना से १२  वर्ष तक मिलने नहीं गए तब यमुना माँ गंगा के पास गई और यह शिकायत की तभी माँ गंगा ने यह बात यम तक पहोचाई ।

तभी यम उनसे मिलने आए।

उन्हें देख यमुना नदी खुश हुई और तरह तरह के व्यंजन भी बनाए।

यम  ने खुश होकर यमुना जी क्यों वर्धन चाहिए।इस पर यमुना जी ने बास यह वरदान मांगा के यम उनसे मिलने दोबारा जल्दी आए यह सुनकर यम उनकी बहन के स्नेह से बड़े प्रसन्न हुए और यमुना जी को अमरत्व का वरदान दिया।

भाई बहन के इस प्रेम को रक्षा बंधन के हवाले से याद करते है ।

 

 

आधुनिक समय-

में राजपूत रानी कर्णावती की कहानी काफी प्रचलित है। राजपूत रानी ने अपने राज्य की रक्षा के लिए मुगल शासक हुमायूं को राखी भेजी।

हुमायूं ने राजपूत रानी को बहन मानकर राखी की लाज रखी और उनके राज्य को शत्रु से बचाया।यह कहानियां सुनकर हम सभी को प्रेरणा मिलती है।

सिखों का शांति संदेश। यह १८ वी शताब्दी में काफी लड़ाई होती थी उसे रोकने हेतु एक सिख खालसा आर्मी के अरविंद सिंह जी ने एक प्रथा शुरू की जिसके अनुसार सिख किसान अपनी खेती के उपज का कोटा सा हिस्सा मुस्लिम आर्मी को देते थे और इस के बदले मुस्लिम आर्मी उनपर आक्रमण नहीं करेंगे।

वर्ष १९०५ ,जिस समय भारत में अंग्रेज डिवाइड एं रुले की योजना चला रहे थे ।

तब रवीन्द्रनाथ टैगोर जी लोगो में एकता के लिए रक्षा बंधन का त्यौहार मनाया।

उस समय ब्रिटिश बंगाल में हिन्दू मुस्लिम की एकता को तोड़ने में लिए काफी कोशिश करती रही ।

लेकिन टैगोर जी और उनके साथियों ने यह उत्सव का आयोजन कर पूरे देश में एकता का संदेश दिया।

प्यार के धागे का महंगे मोतियों में बदलाव

इस पर्व मै रेशम का धागा सबसे मत्वपुर्ण होता है।

जिसे वे अपने भाई के कलाई पर बांधती है किन्तु आज बाजार में अनेक प्रकार की राखियां उपलब्ध हैजिज्मे कुछ तो सोने चांदी की भी होती है ।

लेकिन साधारण तौर पे बाजार मै यह १० से १००० रुपए की बिकती है।

रेशम के समन्य धागे के बना यह प्यार का बंधन  अब धीरे धीरे दिखावे मै तब्दील हो रहा है।

सरकारी प्रबंध-


इस अवसर पर भारत सरकार डाक सेवा पर चूट देते है।

इस दिन के लिए खास तौर पर १० रुपए के लिफाफे की बिक्री करते है ताकि इस ५० ग्राम के  लिफाफे में बहना अपने भाई को ४-५ राखी एक साथ भेज सकती है।

जबकि समन्या २० ग्राम के लिफाफे मै केवल एक ही राखी भेजी जा सकती है।

यह अवसर डाक विभाग द्वारा बहनों को भेट है।

और दिल्ली में बस ट्रेन वे मेट्रो में महिलाओं से रक्षा बंधन के दिन टिकट नहीं लिया जाता।

निष्कर्ष

रक्षाबंधन पर राखी बांधने की हमारी सदियों पुरानी परंपरा रही है।

सबसे महत्वपूर्ण है कि आप जीवन का उत्सव मनाये।

सभी भाईयों और बहनों को एक दूसरे के प्रति प्रेम  और कर्तव्य का पालन और रक्षा का दायित्व लेते हुए ढेर सारी शुभकामना के साथ रक्षाबंधन का त्योहार मनाना चाहिए।राखी बांधने से भाई और बहन के बीच किसी भी प्रकार का मनमुटाव ख़तम हो जाता है।

राखी का पर्व उनके जीवन में एक दूसरे की महत्व को बताने का कार्य करता है अतः हम सभी को यह उत्सव परंपरागत विधि से मनाना चाहिए।


-आज यह त्योहार हमारी संस्कृति की पहचान है और हमें इस बात पर गर्व है।लेकिन भारत में जहां बहनों के लिए यह विशेष उत्सव मनाया जाता है वहीं कुछ लोग है जो भाई के बहनों को गर्भ में मार देते है।

– कहीं बहियो के कलाई पर राखी इसी लिए नहीं बंधी जाती क्युकी उनके माता पिता ने उन्हें इस दुनिया में आने ही नहीं दिया। जो की शामरनक है  यह महिला को देवी माना जाता है वहीं कन्या भ्रूण हत्या के मामले सामने आते है ।हमें इस अपराध पर जल्द ही काबू पना चाहिए और हो सके इतना समझ में जागरूकता लानी चाहिए। तभी हमारा देश लिंगनुपत से मुक्त होगा ।आपको और आपके परिवार को bharat ke utsav ke की तरफ से राखी की धेर सारी शुभकामनाएं।

या रब मेरी दुवाओ में इतना असर रहे ,
  फूलो भरा सदा मेरी बहन का घर रहे “